झर झर झर अमृत रस झरता रसिक भ्रमर को आने दो /
भावों की बहती सरिता से मधुरस भर ले जाने दो //
नीरस जीवन में रस आया
कोयल कूके नीरव में
अनहद नाद बजे ;मन उलझा
शव्द विहग के कलरव में
मन ले रहा हिलोर आज अब झूम झूम कर गाने दो /
भावों की ''''''''''''''''''''''''''''''
चली पवन उड् चले मेघ
बनगए छन्द रस भर लाये
भरे स्रोत कल कल ध्वनि में
मुखरित होकर बाहर आए
स्वर तरंग में डूब गया मन सदगुरु दर्शन पाने दो
भावों ''''''''''''''''''''''''''''''
चन्द्र चाँदनी चित में चमकी
चकित चकोर खिंचा पल में
मिला चैन भई रैन सुहानी
परा प्रकृति के अंचल में
चंचलता को स्थिर करने ध्यान योग में जाने दो /
भावों की ''''''''''''''''''''''''''''''
कुछ सोये कुछ स्वप्न देखते
कुछ झूमें मधु शाले में
जो जागे वे रमे हुए हैं
प्रेम तत्त्व के प्याले में
उनको गीता मानस गंगा जल पीयूष पिलाने दो /
भावों की ''''''''''''''''''''''''''''''
कंचन मृग इस जग का वैभव
अविवेकी का ज्ञान हरे
हुए मुक्त जो ब्रह्म अग्नि में
निज आत्मा का हवन करे
मधुकर ;जिनके मन जिज्ञासा ज्योति से ज्योति मिलाने दो /
भावों की ''''''''''''''''''''''''''''''
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